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Manish Tiwari, Jagran


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शांत-निश्चिंत भाजपा

Posted On: 12 Jan, 2010  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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भारत के ओबामा

Posted On: 30 Dec, 2009  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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Hello world!

Posted On: 30 Dec, 2009  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा:

के द्वारा:

मेरे देखे भाजपा का मनोबल टूट चुका है, बार बार हार के कारण। और दूसरी बात आपसी कलह इतनी तेज है, एक दूसरे को छोटा दिखाने की प्रतियोगिता पार्टी में इस कदर हावी है कि उन्‍हें आम आदमी के दर्द का एहसास ही नहीं हो रहा है। फिर रही बात नेतृत्‍व की, वह भी कहीं दिखता नहीं । विचारधारा वाली पार्टी के साथ अक्‍सर यही समस्‍या होती है कि जब उसकी हार होती है, जब उसमें बिखराव होता है तो एक सूत्र में उसे जुड़ने में काफी दिक्‍कत होती है, हरके के पास अपना तर्क होता है, अपना विचार होता है और यही विचार एक ओर नया भवर खड़ा कर देता है, भाजपा की वर्तमान त्रासदी शायद यही है। क्‍या भाजपा के दिग्‍गज नेता नितिन गडकरी को अपना नेता मानते हैं, शायद नहीं। नेता का आभाव, सशक्‍त नेतृत्‍व की कमी, अपसी कलह जैसे मुद़दे इतने हावी हैं कि उन्‍हें और कुछ दिखता ही नहीं। आज सरकार को घेरने के लिए जितने मुद़दे है उतने मुद़दे कांग्रेस के पास कभी नहीं थे, जब वह विपक्ष में थी, लेकिन याद कीजिए उसने वाजपेयी सरकार को कितना परेशान किया था। भाजपा की नैया तो अब राम भरोसे ही है। जनता का भी राम ही मालिक है।

के द्वारा:

मनीष जी, आपका लेख पढ़ा. आपके लेख को पढने से बीजेपी के प्रति आपका लगाव भी प्रतिलक्षित हुआ. लोक सभा चुनाव हुई अधिक दिन नहीं हुई हैं और आपने भी देखा होगा की चुनाव के समय बीजेपी का मुख्य चुनावी मुद्दों में महंगाई भी एअक प्रमुख मुद्दा था. लोक सभा चुनाव के पूर्व भी बीजेपी द्वारा विभिन्न स्तर पर आन्दोलन किया गया था, परन्तु जब जनता को इस मुद्दे पर मुहर लगाने का समय आया तो वह जनता पुनः मंहगाई के समर्थन में खड़ी हो कर कांग्रेस नित सरकार बनवाई. अब वही सरकार जनता को खून के आंसू रुला रही है. इन सब के बावजूद बीजेपी ने इन मुद्दों को कभी छोड़ा नहीं है और विभिन्न स्तर पर इसको लेकर आन्दोलन हो रहे हैं. कल भी दिनांक १७ जनवरी को मंडल स्तर से लेकर जिला स्तर तक धरना का आयोजन होने जा रहा है. महोदय, मै भी बीजेपी का कार्यकर्ता नहीं हूँ पर इतना तो कह हीं सकता हूँ की इस मंहगाई के लिए जनता भी कम जिम्मेवार नहीं है. वर्त्तमान में उपरी नेतावों के चुप रहने का स्पस्ट कारण समझ में आता है और शायद आप इसे देख नहीं पा रहे हैं. नितिन गडकरी जी को नया अध्यक्ष बनाया गया है और वर्तमान में उनके पास वही पुरानी समिति है जिसके प्रमुख राजनाथ सिंह जी थे. नए अध्यक्ष को अपनी समिति बनाने का भी समय आप नहीं देना चाहते. वह भी उस अध्यक्ष को, जिससे पुरे बीजेपी परिवार को हीं नहीं, अपितु पुरे देश को ढेर सारी उम्मीदें हैं. सम्भव्ह्तः यह आने वाली आंधी के पहले की शांति हो. आपने लिखा भी है शांत-निश्चिन्त बीजेपी. संभवतः आप भी जानते होंगे की जहाँ आंधी आनी होती है वहां का वातावरण शांत-निश्चिन्त हो हीं जाता है परन्तु ऊपर से शांत-निश्चिन्त दिख रहे वातावरण के अन्दर हीं अन्दर बहुत कुछ घटित होते रहता है. शायद इसलिए शांत-निश्चिन्त बीजेपी. धन्यवाद

के द्वारा:




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